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Gorakhmundi Indian Globe Thistle (गोरखमुंडी)

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​भार
200 Grams
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इस आइटम के बारे में
  • ताजा और शुद्ध सामग्री का उपयोग करने के लिए विशेष देखभाल की जाती है, जड़ी बूटियों को अपनी प्राकृतिक सुगंध, रंग, स्वाद, शुद्धता और प्रभावशीलता को बनाए रखने के लिए पारंपरिक / आधिकारिक ग्रंथों / विधियों के अनुसार ठीक से साफ और संसाधित किया जाता है
  • ताजा और शुद्ध प्राकृतिक कार्बनिक जड़ी बूटियों के लिए आधुनिक चिकित्सा में कोई विकल्प नहीं हैं
  • प्राकृतिक सब कुछ – जिस तरह से माँ प्रकृति हमारे खाद्य पदार्थ होने का इरादा

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Description

गोरखमुंडी   Gorakhmundi: फायदे से भरपूर है 
आप गोरखमुण्डी या गोरखमुंडी के फायदे (gorakhmundi ke fayde) के बारे में शायद कुछ नहीं जानते होंगे। यह एक जड़ी-बूटी है जिससे शरीर को बहुत लाभ होता है। आयुर्वेद के अनुसार, बरसों से आयुर्वेद चिकित्सक मरीजों की बीमारियों के इलाज के लिए गोरखमुण्डी का  उपयोग करते आ रहे हैं। आप भी गोरखमुण्डी से फायदे लेकर अनेक रोगों का इलाज कर सकते हैं।
पतंजलि के अनुसार, गोरखमुण्डी तिल्ली (Spleen) विकार, पीलिया (Jaundice), पित्त विकार, वात विकार, कंठमाला, टीबी (क्षयरोग) और खुजली (Itching) आदि रोगों में बहुत लाभ पा सकते हैं। आइए जानते हैं कि गोरखमुंडी के और क्या-क्या फायदे हैं।
गोरखमुंडी क्या है? (What is Gorakhmundi in Hindi?)
गोरखमुण्डी का स्वाद कड़वा और तीखा होता है। इसके फूलों में भी यही गुण पाए जाते हैं। गोरखमुंडी रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। यह जीवाणुरोधी (Anti Bacterial) एवं कवकरोधी (Anti Fungal) होता है। इन्द्राक्त रसायन, अमृतादि तेल तथा चन्दनादि तेल में इसका प्रयोग किया गया है। 
गोरखमुण्डी का पौधा (gorakhmundi plant) 30-60 सेमी ऊँचा, गन्धयुक्त तथा जमीन पर फैला हुआ होता है। ठंड के मौसम में गोरखमुण्डी के पौधों में पहले फूल और फिर बाद में फल लगते हैं। इसके फूल बैंगनी रंग के, तेज गन्ध वाले तथा गोल घुंडियों में लगे हुए होते हैं। इन्ही घुंडियों को मुण्डी कहा जाता है। इसकी दो प्रजातियां पाई जाती हैं।
यह दाद, कुष्ठ (Leprosy) तथा गर्भाशय के दर्द (Cervix Pain) के उपचार में काम आता है। इसके साथ ही गोरखमुण्डी अपच, मिर्गी (Epilepsy), गलगण्ड (Goiter) एवं हाथीपाँव (Elephantiasis) आदि रोगों को ठीक करने में सहायता करता है। यहां गोरखमुंडी से होने वाले सभी फायदे के बारे को बहुत ही आसान शब्दों (gorakhmundi in hindi) में लिखा गया है ताकि आप गोरखमुंडी से पूरा-पूरा लाभ ले पाएं।
अनेक भाषाओं में गोरखमुण्डी के नाम (Gorakhmundi Called in Different Languages)
गोरखमुण्डी का लैटिन नाम स्फेरेन्थस इण्डिकस Sphaeranthus indicus Linn., Syn-Sphaeranthus hirtus Willd.) है, और यह ऐस्टरेसी (Asteraceae) कुल का है। देश-विदेश में गोरखमुण्डी को अन्य नामों से भी जाना जाता है, जो ये हैंः-
Gorakhmundi in-
  • Hindi – मुण्डी, गोरखमुण्डी
  • English – Indian globe thistle (इण्डियन ग्लोब थिसिल)
  • Sanskrit – मुण्डी, कदम्बपुष्पिका, भिक्षु, श्रावणी, तपोधना, श्रवणाह्वा, मुण्डतिका, श्रवणशीर्षका
  • Urdu – कामदरियुस (Kamdariyus), मुण्डी (Mundi)
  • Oriya – बोकाशुङ्गी (Bokashungi), मुरिसा (Murisa)
  • Kannada – मुण्डी (Mundi)
  • Gujarati – गोरखमुण्डी (Gorakhmundi), बोडियोकालरा (Bodiokalara)
  • Telugu – बोडेसोरम (Bodasoram), बोडा तरपु (Boda tarapu)
  • Tamil – कोट्टक (Kottak), कोट्टक करण्डई (Kottak karandai)
  • Nepali – सुपारी झार (Supari jhar)
  • Punjabi – घुण्डी (Ghundi), मुण्डिबूटी (Mundibuti)
  • Bengali – मुरमुरिया (Murmuriya), छागुल नादी (Chagul nadi)
  • Marathi – मुण्डी (Mundi), बरस वोडी (Barasa vodi)
  • Malayalam – मिरनगनी (Mirangani), अट्टकामन्नी (Attakkamanni)
  • Arabic – कैमजारियस (Kamzariyus)
  • Persian – कामाडुराइस (Kamaduriyus)
गोरखमुंडी के फायदे और उपयोग (Gorakhmundi Benefits and Uses in Hindi)
औषधीय गुणों से भरपूर गोरखमुण्डी का प्रयोग ढेर सारे रोगों को ठीक करने के लिए किया जाता है, जो ये हैंः-
मुंह से बदबू आने की परेशानी में गोरखमुंडी फायदेमंद (Benefits of  Gorakhmundi in Oral Disease in Hindi)
  • गोरखमुंडी चूर्ण को कांजी में मिलाकर थोड़ा-थोड़ा पिलाएं। इससे मुंह से दुर्गन्ध आना बंद होता है।
  • आप किसी दन्तमंजन में इसके फूल के चूर्ण मिलाकर मंजन करें। इससे भी मुंह से दुर्गन्ध आना बंद होता है।
Bad mouth breath
सिर के रोग में गोरखमुंडी के फायदे (Benefits of  Gorakhmundi in Head Diseases in Hindi)
गोरखमुण्डी के 3-5 मि.ली. रस में 500 मि.ग्रा. काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर सुबह शाम पिलाने से सिर के रोगों में लाभ होता है।
बालों की समस्या में गोरखमुंडी के औषधीय गुण से लाभ (Gorakhmundi Beneficial in Hair Problem in Hindi)
  • फूल लगने से पहले गोरखमुण्डी की जड़ या पंचांग को लेकर थोड़ा सुखा लें। इतनी ही मात्रा में भृंगराज का चूर्ण मिला लें। इसे 2-3 ग्राम तक मधु व घी से 40-80 दिन तक सेवन करें। इससे बालों के सब रोग दूर होते हैं। इससे बाल काले होने (gorakhmundi ke fayde) लगते हैं।
  • गोरखमुंडी के पौधों को छाया में सुखा-पीस लें। इसमें बराबर मात्रा में मिश्री मिला लें। इसका 1 चम्मच सुबह और शाम दूध के साथ सेवन करने बाल सफेद नहीं होते हैं।
  • आँखों के रोग में गोरखमुंडी के फायदे (Gorakhmundi Benefits to Cure Eye Disease in Hindi)
  • हर साल चैत्र मास में 4-5 मुंडी के ताजे फल को दांतों से चबाकर पानी के साथ खाने से आँख के रोगों में लाभ होता है।
  • 1-2 ग्राम गोरखमुुण्डी पंचांग के सूखे चूर्ण में बराबर मात्रा मिश्री में मिला लें। इसे 200 मि.ली. गाय के दूध के साथ सुबह-शाम खाने से आँखों के बहुत से रोग ठीक होते हैं।
  • आँखों की रोशनी कम हो जाने पर गोरखमुुण्डी के फूल या पत्तों के रस को दिन में दो बार आँखों में लगाते रहने से लाभ होता है।
  • ताजे गोरखमुुण्डी पंचांग के रस (gorakhmundi rus) को तांबे के बर्तन में रख लें। इसे नीम के डंडे से खूब रगड़ें। जब वह काला हो जाए तो रूई को अच्छी तरह भिगोकर सुखा लें। आँखों में दर्द होने पर इस रूई को जल में भिगोकर आंखों पर रखें। इससे बहुत लाभ होता है।
  • मंडी के फूलों को पीसकर आंखों में काजल की तरह लगाने से आंख आने की परेशानी में लाभ होता है।
                                 और पढ़ें: आंखों के रोग में सुपारी का प्रयोग
शरीर से बदबू आने की परेशानी में गोरखमुंडी से लाभ  (Gorakhmundi Uses in Body Odor Problem in Hindi)
1-2 ग्राम गोरखमुंडी चूर्ण का सेवन करने से शरीर की दुर्गन्ध खत्म होती है। बेहतर लाभ के लिए किसी आयुर्वेदि चिकित्सक से जरूर परामर्श लें।
Sweat Odor problem
गले की खराश में गोरखमुंडी से लाभ (Gorakhmundi Benefits in Throat Disorder in Hindi)
गोरखमुण्डी के फलों के 50 ग्राम चूर्ण में 10 ग्राम सोंठ चूर्ण मिला लें। इसे शहद के साथ डेढ़ ग्राम की मात्रा में दिन में 3-4 बार चटाने से गले की खराश खत्म होती है और आवाज ठीक हो जाती है।
और पढ़े – गले के रोग में कम्पिल्लक के फायदे
थॉयराइड ग्रंथी की सूजन में गोरखमुंडी से लाभ (Benefits of Gorakhmundi to Cure Thyroid Gland Disease in Hindi)
मुण्डी पंचांग को पीसकर गले में लगाने से घेंघा रोग (थायरॉयड ग्रंथी) की सूजन में लाभ होता है।

और पढ़े- थायरॉइड रोग का घरेलू इलाज

गोरखमुंडी के औषधीय गुण से खांसी का इलाज (Uses of Gorakhmundi in Fighting with Cough in Hindi)
  • गोरखमुुण्डी की जड़ के 1-2 ग्राम चूर्ण (gorakhmundi ) में मधु मिला लें। इसका सेवन करने से सूखी खाँसी में लाभ होता है।
  • मुंडी के पत्तों के 5 मिली रस को दूध के साथ उबाल लें। इसमें चीनी मिलाकर पीने से खाँसी में लाभ होता है।और पढ़ें: सूखी खांसी में शरातवरी के फायदे
  • गोरखमुंडी के औषधीय गुण से टीबी रोग का उपचार (Gorakhmundi Benefits in T.B. Disease  in Hindi)
  • गोखरू, खस, मंजीठ, शतावरी तथा श्रावणी आदि द्रव्यों से बने श्रृंदष्ट्रादि घृत (5 ग्राम) का सेवन करें। इससे टीबी की बीमारी की शुरुआती अवस्था में लाभ (gorakhmundi ke fayde) होता है।
  • मिश्री, मुण्डी, काकोली आदि द्रव्यों को दूध (100 मिली) में पकाएं। इसका सेवन करने से खाँसी, बुखार, जलन तथा टीबी रोग में लाभ होता है। और पढ़ें – खाँसी में लाजवंती के फायदे
Gorakhmundi benefits in TB disease

हृदय को स्वस्थ बनाने के लिए गोरखमुण्डी का गुण लाभदायक (Gorakhmundi is Beneficial for Healthy Heart in Hindi)

  • 10-20 मिली मुण्डी जड़ के काढ़े का सेवन करने से सीने के दर्द व चुभन से छुटकारा मिलता है।
  • गोरखमुंडी के फलों का अर्क, आँखों के रोग और हृदय की कमजोरी दूर करता है। शुरू में इसको 15 मि.ली. की मात्रा में लेना चाहिए, और बाद में मात्रा बढ़ाते रहना चाहिए। इस दौरान खट्टी और गर्म चीजें, अधिक परिश्रम व मैथुन से बचना चाहिए।  और पढ़ें: हार्ट ब्लॉकेज खोलने के उपाय
पेट की बीमारी में गोरखमुंडी का गुण फायदेमंद (Benefits of Gorakhmundi to Treat Abdominal Disease in Hindi)
  • एक ग्राम गोरखमुंडी चूर्ण  को जल के साथ सुबह-शाम सेवन करने से पेट के कीड़े बाहर हो जाते हैं।
  • रोज जड़ तथा बीज के 2.5-3 ग्राम चूर्ण में मधु मिलाकर सेवन करें। इससे पाचनशक्ति और अमाशय मजबूत  बनते हैैं। इससे पेट के कीड़े खत्म होते हैं।
  • एरंड के 10 मि.ली. तेल (Castor Oil) के साथ 3 ग्राम गोरखमुंडी चूर्ण को सुबह-शाम सेवन करने से जलोदर रोग में लाभ होता है।
  • 3 ग्राम गोरखमुंडी चूर्ण को बकरी या गाय के दूध के साथ सेवन करने से पेट की गैस की समस्या में लाभ होता है।
  • मुंडी की जड़ के 1 ग्राम चूर्ण को मट्ठे के साथ खाने से एसीडिटी में लाभ होता है। और पढ़ें : गैस दूर करने के घरेलू उपाय
                 गोरखमुंडी के सेवन से शरीर की जलन का इलाज (Gorakhmundi Uses in Body Irritation in Hindi)
  • रोज सुबह 12-12 ग्राम गोरखमुण्डी फल तथा सेंधा नमक को मिला लें। इसे 3 लीटर जल में मिलाकर काढ़ा बना लें। इसे 10-20 मि.ली. मात्रा में सेवन करने से शरीर की जलन कम होती है।
  • इसके पत्ते एवं फूल से बने काढ़ा का सेवन करने से भी जलन कम (gorakhmundi ke fayde) होती है।
                  गोरखमुंडी के उपयोग से पेचिश का इलाज (Gorakhmundi Benefits to Stop Dysentery in Hindi)
  • गोरखमुण्डी की जड़ और सौंफ को बराबर मात्रा में (लगभग 2-4 ग्राम) पीस लें। इसमें मिश्री-युक्त जल से सुबह-शाम सेवन करें। इससे आँव वाली पेचिश में लाभ होता है।
  • मुंडी की जड़ के 2 ग्राम चूर्ण में 1 ग्राम मरीच चूर्ण मिलाकर सेवन करने से भी पेचिश में लाभ होता है। और पढ़ें – पेचिश में पीपल के फायदे
Benefits of Gorakhmundi in Dysentery
गोरखमुंडी के सेवन से आंतों की बीमारी का इलाज (Uses of Gorakhmundi for Intestinal Disease in Hindi)
मुंडी के जड़ के काढ़े का 20 मि.ली. सेवन करने से आंत की बीमारियों खत्म होती हैं, लेकिन बेहतर परिणाम के लिए किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से जरूर लाभ लें।
गोरखमुण्डी के सेवन से यौन रोग का उपचार (Gorakhmundi Treats Vaginal Disease in Hindi)
  • 10 ग्राम ताजे पंचांग (न मिलने पर छाया में सुखाए गए पंचांग) को जल में पीस लें। इसे पिलाने से योनि का दर्द कम होता है। इससे डायबिटीज में भी लाभ (gorakhmundi ke fayde) होता है।
  • गोरखमुुण्डी के पेस्ट को एरण्ड के तेल में भूनकर ठण्डा होने दें। इसे योनि में लेप करने से भी योनि के दर्द में लाभ होता है।
  • वात तथा पित्त के कारण होने वाले योनि के रोगों में बला, गोरखमुण्डी, शालपर्णी, क्षीरकाकोली, पीलूपर्णी, मूर्वा आदि द्रव्य लें। इनके साथ पकाए हुए बलादि यमक घी को उपयुक्त मात्रा में सेवन करने से लाभ होता है। इसे नियमित रूप से सेवन करना है। और पढ़ें – यौन रोग में प्याज के फायदे
काँच निकलने की परेशानी में गोरखमुंडी के फायदे (Gorakhmundi Help to Treat Prolapsus in Hindi)
मुंडी की जड़ के तेल को गुदा में लगाने से काँच निकलना (शौच में जोर लगाने से आंत का निकलना) बंद होता है।
गोरखमुण्डी के सेवन से पीलिया का इलाज (Gorakhmundi Benefits in Fighting with Jaundice in Hindi)
5-10 मिली पंचांग के रस का सेवन करने से पीलिया में लाभ होता है। पीलिया में गोरखमुंडी का उपयोग कर लाभ लेने के लिए किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से जरूर परामर्श लें।
और पढ़ें – पीलिया का घरेलू उपचार
गोरखमुण्डी के गुण से डायबिटीज पर नियंत्रण (Gorakhmundi Uses in Controlling Diabetes in Hindi)
गाय के दूध के साथ 1-2 ग्राम गोरखमुंडी चूर्ण का सेवन करने से डायबिटीज (मधुमेह) में लाभ होता है। 
और पढ़े – डायबिटीज में अगरु के फायदे
              गोरखमुण्डी के गुण से बवासीर का इलाज (Uses of Gorakhmundi in Piles Treatment in Hindi)
  • मुण्डी और एरंड के पत्तों के 5-5 मि.ली. रस को मिलाकर पिलाएं। इसके पत्तों की लुगदी मस्सों पर बाँधें। इसके अलावा पंचांग का धुआं मस्सों पर देने से बवासीर ठीक होता है।
  • 1-2 ग्राम गोरखमुंडी चूर्ण को छाछ या गाय के दूध के साथ सेवन करने से अर्श (बवासीर) नष्ट होता है।
  • 1-2 ग्राम मुंडी चूर्ण को बासी पानी के साथ सेवन करने से भगन्दर में लाभ होता है।
Piles (Hemorrhoids) home remedies
और पढ़ें – बवासीर में कलम्बी के फायदे
                   नपुंसकता की समस्या में गोरखमुंडी का सेवन फायदेमंद (Uses of Gorakhmundi in Impotence in Hindi)
  • मुंडी की ताजी जड़ को पीसकर, कलईदार पीतल की कढ़ाई में रख लें। इसे चाच गुना काले तिल के तेल और सोलह गुना पानी डालकर पकाएं। केवल तेल रहने पर छान लें। इस तेल से कामेन्द्रियों पर मालिश करने तथा 10-30 बूँद तक पान में लगाकर खाने से लाभ होता है। इसे दिन में 2-3 बार खाना है।
  • 1-2 ग्राम मुण्डी चूर्ण को 50 मिली नीम के पत्ते के रस (gorakhmundi rus) के साथ खाने से लाभ होता है।
  • 1-2 ग्राम मुण्डी चूर्ण को बराबर मात्रा में चीनी के साथ मिलाकर सेवन करने से वीर्य विकार खत्म होते हैं। और पढ़े: वीर्य रोग में गुलब्बास के फायदे
गोरखमुण्डी के औषधीय गुण से चर्म रोग का इलाज (Gorakhmundi Uses in Skin Disease in Hindi)
  • गोरखमुुण्डी के पत्तों को जल में पीसकर लेप करें। इससे चर्म रोग ठीक होता है।
  • गोरखमुंडी के पत्तों के रस (gorakhmundi rus) को लगाने से अनेक चर्म रोग एवं पुराने घाव ठीक होते हैं।
  • इसके लगातार सेवन से गीली और सूखी खुजली मिट जाती है।
  • मुण्डी पंचांग पेस्ट में तेल मिलाकर लेप करने से खुजली ठीक होती है।  और पढ़ें – घाव सुखाने में पारिजात के फायदे
                   पार्किन्सन रोग में गोरखमुण्डी से लाभ (Benefits of Gorakhmundi in Parkinson Disease in Hindi)
  • दो ग्राम गोरखमुण्डी चूर्ण में 500 मिग्रा लौंग चूर्ण मिलाकर खाने से पार्किन्सन रोग में लाभ होता है।
  • मुण्डी के 50 ग्राम चूर्ण में 100 ग्राम लौंग मिला लें। इसे 1 से 3 ग्राम की मात्रा में मधु मिलाकर सुबह और शाम सेवन करने से भी लाभ होता है। और पढ़ें – टाइफाइड में लौंग फायदेमंद
                 गोरखमुंडी के गुण से गठिया का इलाज (Gorakhmundi Uses to Treat Arthritis in Hindi)
  • तीन ग्राम मुंडी और एक ग्राम कुटकी के चूर्ण को मधु के साथ रोज तीन बार सेवन करने से गठिया में लाभ होता है।
  • मधु और घी के साथ 1-2 ग्राम मुण्डी चूर्ण का सेवन करें, और ऊपर से गुडूची का काढ़ा पिएं। इससे भी गठिया ठीक हो जाता है।
  • गोरखमुण्डी चूर्ण के 1-2 ग्राम का सेवन गुनगुने पानी के साथ करने से जोड़ों के दर्द में लाभ होता है।
  • मुण्डीफल के साथ बराबर मात्रा में सोंठ चूर्ण को मिला लें। इसे गुनगुने जल से दोनों समय 3 ग्राम की मात्रा में सेवन करें। इससे गठिया में फायदा होता है।
  • गोरखमुंडी के फलों को महीन पीसकर दर्द वाले स्थान पर लेप करें। इससे जोड़ों के दर्द और सूजन में लाभ (gorakhmundi ke fayde) होता है।
  • श्रावणी, क्षीरकाकोली, जीवक, ऋषभक तथा मुलेठी आदि द्रव्यों का पेस्ट बना लें। इसे गाय के दूध के साथ घी में पकाएं। इस घी को 5 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से गठिया में लाभ होता है।
Gorakhmundi benefits in arthritis
रक्त विकार में गोरखमुण्डी का सेवन फायदेमंद (Gorakhmundi Benefits in Blood Disorder in Hindi)
  • मुण्डी के पत्ते के रस (gorakhmundi rus) के साथ अड़ूसे के पत्ते का रस मिला लें। इसका एक चम्मच दिन में तीन बार सेवन करने से खून की गर्मी शांत होती है।
  • 15-20 मिली पंचांग काढ़ा का सेवन करने से रक्त शुद्ध होता है।
             सेक्सुअल स्टेमना बढ़ाने के लिए गोरखमुण्डी का सेवन (Gorakhmundi Increases Stamina in Hindi)
  • गोरखमुंडी के पौधों को छाया में सुखा-पीस लें। बराबर मात्रा में मिश्री मिला लें। इसका 1 चम्मच सुबह और शाम दूध के साथ सेवन करने से शारीरिक कमजोरी दूर होती है। इससे शारीरिक ताकत मिलती है।
  • गोरखमुंडी के बीजों को पीस लें। इनमें बराबर मात्रा में चीनी मिलाकर 2-3 ग्राम मात्रा में खाने से बल और आयु में वृद्धि होती है।
  • इसके 1-2 ग्राम चूर्ण को घी के साथ चाटने से शारीरिक शक्ति बढ़ती है।
  • गोरखमुंडी के पौधो के छाया में सूखाकर चूर्ण बना लें। इसके 1-2 ग्राम में दोगुना शहद मिलाकर 40 दिन तक गर्म दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करने से शारीरिक बल की वृद्धि होती है।
  • जीवक, ऋषभक, मेदा, जीवन्ती, मुंडी तथा महाश्रावणी आदि द्रव्य लें। इसे विधिपूर्वक पका कर वृष्य घी बना लें। इसे 5 ग्राम की मात्रा में नियमित सेवन करें। इससे बल मिलता है और चेहरे पर निखार आता है।
  • श्रावणी, महाश्रावणी, मेदा, मुंडी आदि द्रव्य लें। 5 ग्राम की मात्रा 6 माह तक दूध के साथ सेवन करें। इससे याद्दाश्त, शारीरिक ताकत बढ़ती है, और चेहरे पर निखार आता है। और पढ़ें – कमजोरी में कलम्बी के फायदे
                    सूजन की समस्या में गोरखमुण्डी से लाभ (Gorakhmundi Reduces Inflammation in Hindi)
  • गोरखमुण्डी फल तथा सेंधा नमक को मिला लें। इसे 3 लीटर जल में काढ़ा बना लें। काढ़ा का 10-20 मि.ली. मात्रा में सेवन करने से जलन तथा सूजन कम होती है।
  • इसके पत्ते एवं फूले से बने काढ़ा का सेवन करने से जलन कम होती है। और पढ़े: सूजन में कोदो के फायदे
  • बुखार उतारने के लिए गोरखमुण्डी का उपयोग 
  • 1-2 ग्राम गोरखमुण्डी चूर्ण (Patanjali gorakhmundi) में 500 मि.ग्रा. काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर खाने से बुखार कम होता है।
  • 2 ग्राम मुंडी चूर्ण में 500 मिग्रा काली मिर्च का चूर्ण मिला लें। इसे शहद या दूध के साथ लेने से बुखार के कारण होने वाली जलन ख़त्म होती है।
Benefits of Patanjali Gorakhmundi in Fighting with Fever
और पढ़ें: बुखार के इलाज में गोखरू के प्रयोग
वातरोग के लिए गोरखमुंडी का उपयोग फायदेमंद (Gorakhmundi Beneficial to Get Relief from Gout in Hindi)
गोरखमुंडी पाउडर वात रोग में फ़ायदेमंद होता है क्योंकि आयुर्वेद के अनुसार गोरखमुंडी में वात शमन का गुण होता है। इसलिए गोरखमुंडी पाउडर वात के लक्षणों को कम करने में मदद करता है। 
सिफिलिस के उपचार में गोरखमुंडी लाभकारी (Gorakhmundi Beneficial to Treat Sphylis in Hindi)
गोरखमुंडी की पत्तियों का प्रयोग सिफिलिस के लक्षणों को कम करने में किया जा सकता है क्योंकि एक रिसर्च के अनुसार इनमे एंटी सिफिलिस का गुण पाया जाता है। 
फोड़ा और खुजली के इलाज में गोरखमुंडी का उपयोग फायदेमंद (Benefit of Gorakhmundi for Scabies and Boil in Hindi)
गोरखमुंडी का उपयोग फोड़े और खुजली जैसी समस्याओं में भी कर सकते है क्योंकि रिसर्च के अनुसार गोरखमुंडी में हीलिंग का गुण पाया जाता है जो कि त्वचा संबंधी रोगों में जल्द आराम देता है। 
प्रमेह से राहत पाने में गोरखमुंडी लाभकारी (Benefit of Gorakhmundi in Gonorrhea in Hindi)
गोरखमुंडी प्रमेह संबंधी लक्षणों को कम करने में मदद करती है, क्योंकि एक रिसर्च के अनुसार गोरखमुंडी में एंटी डायबिटिक का गुण पाया जाता है जिसके कारण ये प्रमेह के लक्षणों को कम करने में मदद करती है। 
जलोदर के इलाज में फायदेमंद गोरखमुंडी (Benefit of Gorakhmundi in Dropsy in Hindi)
जलोदर में गोरखमुंडी का प्रयोग फायदेमंद होता है क्योंकि गोरखमुंडी में डायूरेटिक के गुण पाया जाता है जो कि जलोदर के लक्षणों को कम करने में मदद करता है। 
खूनी दस्त को रोकने में गोरखमुंडी लाभकारी (Gorakhmundi Beneficial in Blood Dysentry in Hindi)
गोरखमुंडी का उपयोग खुनी दस्त या पेचिश को दूर करने में कर सकते है क्योंकि रिसर्च के अनुसार गोरखमुंडी और जीरा का उपयोग खूनी दस्त की प्रवृति को नियंत्रित करता है। 
सिरदर्द में गोरखमुंडी फायदेमंद (Gorakhmundi Beneficial to Treat Headache in Hindi)
सिरदर्द या माइग्रेन के दर्द से राहत पाने के लिए गोरखमुंडी का सेवन फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि गोरखमुंडी में एंटी माइग्रेन के गुण पाये जाते है। 
कुत्ते के काटने पर गोरखमुण्डी का इस्तेमाल फायदेमंद (Gorakhmundi is Beneficial in Dogs Bite in Hindi)
मुण्डी के पंचांग चूर्ण को गाय के मूत्र के साथ लेप करें। इससे कुत्ते के काटने के कारण होने वाले रोगों ठीक होते हैं।
Dog bite home remedies
गोरखमुंडी के उपयोगी भाग (Useful Parts of Gorakhmundi in Hindi)
यहां गोरखमुंडी से होने वाले सभी फायदे के बारे को बहुत ही आसान शब्दों (gorakhmundi in hindi) में लिखा गया है ताकि आप गोरखमुंडी से पूरा-पूरा लाभ ले पाएं, लेकिन औषधि के रूप में गोरखमुण्डी का प्रयोग करने के लिए चिकित्सक की सलाह जरूर लें। 
गोरखमुंडी का इस्तेमाल कैसे करें? (How to Use Gorakhmundi?)
आप गोरखमुंडी का इस्तेमाल इस तरह कर सकते हैंः-
  • काढ़ा – 15-20 मिली
  • चूर्ण (Patanjali Gorakhmundi)  – 1-2 ग्राम
गोरखमुंडी कहां पाया या उगाया जाता है? (Where is Gorakhmundi Found or Grown?)
पूरे भारत में, विशेष तौर पर हिमाचल प्रदेश में 1800 मीटर की ऊंचाई तक गोरखमुंडी के पौधे (gorakhmundi plant) अपने आप पैदा होते हैं। धान के खेतों तथा नम जंगलों में इसके पौधे अधिक मिलते हैं।

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